मंगलवार, 25 मई 2010

कैलिफोर्निया का हास्य कवि सम्मेल्लन और मेरा ब्लॉगर पर पहला पोस्ट.

बहुत दिनों से सोच रहा था की ब्लॉगर पर आ जाऊं. वर्ड प्रेस वाला ब्लॉग लगभग निष्क्रिय है. मेरे मित्र  एवं गुरु भाई वीनस केसरी भी अक्सर पूछते थे की ब्लॉगर पर कब आ रहे हैं. मैं सोचता था की जब कुछ कहने योग्य होगा तो उसी दिन ब्लॉगर पर भी नया ब्लॉग बना लूँगा. टालता रहा.  परन्तु इस टाल मटोल के पीछे  शायद  कोई  दैवीय योजना थी. यह ब्लॉग शुरू होना था श्री राकेश खंडेलवाल जी के कर कमलों द्वारा लिखित एक कविता से जो उन्होंने मेरे परिवार के लिए लिखी.

 (सुनीला: मेरी पत्नी, काशिका: बड़ी बेटी, शिवेन: बेटा, हंसिका: छोटी बेटी)

२२ मई को सनिवेल, कैलिफोर्निया में हास्य कवि सम्मलेन था. राकेश जी भी कविता पाठ करने वाले थे. वीनस जी से बात हुई तो  उन्होंने बताया की श्रीमती निर्मला कपिला जी भी आजकल कैलिफोर्निया आई हुईं हैं. पता चला वे भी सनिवेल के पास ही हैं. फिर क्या था, उनसे फोन पर बात हुई और तय हुआ की सम्मेल्लन में मिलेंगे.  श्रीमती अजित गुप्ता भी संयोगवश कैलिफोर्निया आई हैं और निर्मला जी के पास उनका संपर्क  फोन नंबर था. शाम को कवि सम्मेल्लन में निर्मला जी, अजित जी और उनके परिवार के साथ मिलना हुआ. बहुत अच्छा लगा. निर्मला जी ने, हस्ताक्षर की हुई, अपनी पुस्तक 'प्रेम सेतु' मुझे भेंट की.


कवि सम्मेल्लन के बाद मैं श्री राकेश खंडेलवाल जी एवं श्री कुमार विश्वास जी से मिला. उन्हें जब पता चला की मैं गुरूजी श्री पंकज सुबीर जी का शिष्य हूँ तो वे बहुत प्रसन्न हुए एवं बहुत आत्मीयता से मिले.



 कवि सम्मलेन से अगले दिन श्री राकेश जी ने मेरे घर आना स्वीकार कर लिया. २३ मई, २०१०, मेरे जीवन के बहुत महत्वपूर्ण दिनों में से एक था. लगभग पूरा दिन राकेश जी के साथ बिताया. उनकी रचनाएँ उन्हीं के स्वर में सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. उन्होंने मुझे कविता और ग़ज़ल के बारे में कई अच्छी ज्ञानवर्धक बातें  बताईं.  मुझे हस्ताक्षर की हुई अपनी पुस्तक "अँधेरी रात का सूरज" भी भेंट की. 

 (राकेश जी, मेरे और मेरे परिवार के साथ)


राकेश जी की हास्य रचना जो उन्होंने सम्मेल्लन में भी पढ़ी और बहुत दाद पायी: