मंगलवार, 8 मार्च 2011

ग़ज़ल: ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब.


पड़ा हुआ जो ये पानी में जाल है साहब,
यकीन जानिये दरिया की चाल है साहब.

खिलाफ ज़ुल्म के गुस्सा है जो ये लोगों में,
ज़रा सी देर का केवल उबाल है साहब.

हरेक बात पे रो रो के बात मनवाना,
ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब.

सुकूने दिल से है दौलत का वैर जग ज़ाहिर,
अमीर है वो मगर ख़स्ताहाल है साहब.

नदी में रह के मगरमछ से वैर रखता है,
उस आदमी की भी हिम्मत कमाल है साहब.

कहाँ कहाँ मेरे हिस्से के ख़्वाब बिखरे हैं,
हमारी नींद का जायज सवाल है साहब.

गरीब के तो हैं सपने भी रोज़मर्रा के,
किराया घर का या रोटी या दाल है साहब.

मैं टूटते हुए घर को बचा नहीं पाया,
अभी तलक मुझे इसका मलाल है साहब.

बह्रे मुज्‍तस मुसम्मन् मख्बून मक्तुअ
मुफायलुन फयलातुन मुफायलुन फैलुन (1212 1122 1212 22)

16 टिप्‍पणियां:

  1. खिलाफ ज़ुल्म के गुस्सा है जो ये लोगों में,
    ज़रा सी देर का केवल उबाल है साहब.

    हरेक बात पे रो रो के बात मनवाना,
    ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब.

    नदी में रह के मगरमछ से वैर रखता है,
    उस आदमी की भी हिम्मत कमाल है साहब.

    गरीब के तो हैं सपने भी रोज़मर्रा के,
    किराया घर का या रोटी या दाल है साहब.

    वाह राजीव भाई वाह...क्या शेर कहें हैं आपने एक से बढ़कर एक...ऊपर वाले चार शेर तो मैं अपने साथ ले जा रहा हूँ लेकिन जो पीछे छोड़े जा रहा हूँ वो भी कमाल के हैं...हीरे से तराशे शेर ग़ज़ल की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगा रहे हैं...इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए आपकी जितनी तारीफ़ की जाए कम होगी...काफियों का इतना खूबसूरत इस्तेमाल बहुत कम दिखाई देता है...ये आपके हुनर का कमाल है...दाद कबूल करें...

    नीरज

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  2. वाह वा

    राजीव जी

    क्या जान लेने का इरादा किया है ?
    पोस्ट-दर-पोस्ट एक से बढ़ कर एक नायाब ग़ज़ल

    औए सबसे बड़ी बात की हर शेर लाजवाब, क्या बात है भाई :)

    बहुत मुश्किल से सधता है ये हुनर

    बाकमाल अशआर के लिए बहुत बहुत बहुत बधाई

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  3. हरेक बात को रो रो के बात मनवाना,
    ये आंसुओं का गलत इस्तेमाल है साहब।

    बेहतरीन गज़ल राजीव जी , मुबारकबाद।

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  4. पड़ा हुआ जो ये पानी में जाल है साहब,
    यकीन जानिये दरिया की चाल है साहब.

    खिलाफ ज़ुल्म के गुस्सा है जो ये लोगों में,
    ज़रा सी देर का केवल उबाल है साहब.....सारे शेर मुतास्सिर करने वाले, एक मुक़म्मल ग़ज़ल...बधाई!
    ----देवेन्द्र गौतम

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  5. वाह! कमाल है ,साहब कमाल!वाह!

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  6. हरेक बात पे रो रो के बात मनवाना,
    ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब.
    मैं टूटते हुए घर को बचा नहीं पाया,
    अभी तलक मुझे इसका मलाल है साहब.
    बहुत देर से आया यहाँ मुझे भी इसका मलाल है साहेब

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  7. हरेक बात पे रो रो के बात मनवाना,
    ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब.

    राजीव भाई कमाल कर दिया आपने

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  8. गरीब के तो हैं सपने भी रोज़मर्रा के,
    किराया घर का या रोटी या दाल है साहब.

    वाह.... हर शेर कमाल का है.... अर्थपूर्ण पंक्तियाँ

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  9. खिलाफ ज़ुल्म के गुस्सा है जो ये लोगों में,
    ज़रा सी देर का केवल उबाल है साहब...

    Rajiv ji ... is zamaane ki nabj pakdi hai aapne ... lajawaab sher kahe hain sab ... mazaa aa gaya ...

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  10. हरेक बात पे रो रो के बात मनवाना,
    ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब.
    kitna sundar likhe hain......wah.

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  11. "गरीब के तो हैं सपने भी रोज़मर्रा के,
    किराया घर का या रोटी या दाल है साहब."

    राजीव जी, शानदार ग़ज़ल कही है, भाव जितने खूबसूरत है उतना ही खूबसूरत आपकी ग़ज़ल का शब्द चयन ओर रदीफ-काफिये का सुंदर निर्वाह है. ढेर सारी बधाई हो.

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  12. आप के शेर एक अलग ही मोहपाश में बाँध लेते हैं, वो चाहे फिर लफ़्ज़ों का हो या फिर कहन का हो. दोनों में से किसी से बचना फिर नामुमकिन सा हो जाता है.
    "पड़ा हुआ जो ये पानी में जाल है साहब,
    यकीन जानिये दरिया की चाल है साहब."
    क्या मतला कहा है, जान ही निकाल दी. वाह वा

    "खिलाफ ज़ुल्म के गुस्सा है जो ये लोगों में...............", बहुत सच्चाई है इसमें.

    "हरेक बात पे रो रो के बात मनवाना,
    ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब."
    इतनी मासूमियत से इतनी बड़ी बात कह दी...........वाह वा, वाह वा. कायल और घायल दोनों कर दिया.

    "सुकूने दिल से है दौलत का वैर जग...........'', अच्छा शेर कहा है.

    "कहाँ कहाँ मेरे हिस्से के ख़्वाब बिखरे हैं,
    हमारी नींद का जायज सवाल है साहब."
    एक बार क़त्ल कर दिया................वाह वा

    "गरीब के तो हैं सपने भी रोज़मर्रा के........", वाह वा
    "मैं टूटते हुए घर को बचा नहीं पाया...............", अच्छा शेर है.

    बारहां पढ़ रहा हूँ. वैसे कौन सी जादुई कलम है आप के पास मगर जो भी है ...............कमाल है साहिब.

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