शनिवार, 9 जून 2012

कोई झोंका तुझे छू कर गुज़र जाए तो अच्छा हो.


तेरी खुशबू फिज़ाओं में बिखर जाए तो अच्छा हो,
कोई झोंका तुझे छू कर गुज़र जाए तो अच्छा हो.

कई दिन से तसव्वुर आपका मेहमां है इस दिल में,
ये मेहमाँ और थोड़े दिन ठहर जाए तो अच्छा हो.

सफर की मुश्किलों का यूं तो कुछ शिकवा नहीं फिर भी,
मेरी मंजिल का हर रस्ता संवर जाए तो अच्छा हो.

कफस में ही अगर रहना है तो उड़ने की हसरत क्यों,
कोई आकर मेरे ये पर कतर जाये तो अच्‍छा हो.

बहुत रुसवा हुआ हूँ मैं यहाँ सच बोल कर यारो,
ये पागलपन मेरे सर से उतर जाए तो अच्छा हो.

सराबों के तअक्कुब में भटकता फिर रहा है जो,
वो भूला सुबह का अब अपने घर जाए तो अच्छा हो.

-आर. बी. 'राज़'

11 टिप्‍पणियां:

  1. कई दिन से तसव्वुर आपका मेहमां है इस दिल में,
    ये मेहमाँ और थोड़े दिन ठहर जाए तो अच्छा हो.

    हृदय छू गयी ये पंक्तियाँ..

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. क्या कहने लाजवाब..
    गजल....:-)
    बहूत बढीया,,,,

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  4. कई दिन से तसव्वुर आपका मेहमां है इस दिल में,
    ये मेहमाँ और थोड़े दिन ठहर जाए तो अच्छा हो.
    वाह वा राजीव भाई, लाजवाब कर दिया है. सानी की खूबसूरती और सादगी जानलेवा है.

    "कफस में ही अगर रहना है तो उड़ने की हसरत क्यों........". उम्दा शेर.

    बहुत रुसवा हुआ हूँ मैं यहाँ सच बोल कर यारो,
    ये पागलपन मेरे सर से उतर जाए तो अच्छा हो.
    कमाल का शेर गढ़ा है, बात बहुत पुरानी है मगर साने में जो लहजा आपने चुना है वो तो खालिस नया है और वही इस शेर की जान है.

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  5. तेरी खुशबू फिज़ाओं में बिखर जाए तो अच्छा हो,
    कोई झोंका तुझे छू कर गुज़र जाए तो अच्छा हो.
    बहुत ही खूबसूरत ...आपकी ग़ज़ल का बेसब्री से इंतजार रहता है

    और हर बार लगता है ऐसा सिर्फ आप ही लिख सकते है ...वाह

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  6. कई दिन से तसव्वुर आपका मेहमां है इस दिल में,
    ये मेहमाँ और थोड़े दिन ठहर जाए तो अच्छा हो.

    वाकई क्या शेर कहा है..... राजीव जी हर एक शेर बेहतरीन.

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