शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई


समाअतों का यहाँ सिलसिला तो हो कोई,
चलो गिला ही सही, इब्तिदा तो हो कोई.

है इंकलाब ही इस दौर की ज़रूरत अब,
पर इन्कलाब यहाँ चाहता तो हो कोई.

मैं आसमान उसे कह भी दूं मगर उसका,
बुलंदियों से कहीं वास्ता तो हो कोई.

मिलेगी तुमको भी सरकार से मदद लेकिन,
तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई.

चलेगा कौन यहाँ सच के साथ? पहले यहाँ,
बिना सहारे के सीधा खड़ा तो हो कोई,

-आर.बी.'राज़'

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (28-07-2012) के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
    चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
    टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
    मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
    शिष्ट आचरण से सदा, अंकित करना भाव।।

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  2. मिलेगी तुमको भी सरकार से मदद लेकिन,
    तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई.
    बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हर शेर लाजबाब , मुबारक हो

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  3. मैं आसमान उसे कह भी दूं मगर उसका,
    बुलंदियों से कहीं वास्ता तो हो कोई.

    चलेगा कौन यहाँ सच के साथ? पहले यहाँ,
    बिना सहारे के सीधा खड़ा तो हो कोई,

    बहुत बढ़िया पंक्तियाँ

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  4. मतले से लेकर मकते तक व्यंजना और रूपक का बेहतरीन निभाव हुआ है गजल में ,दो टूक ,बिंदास ..कृपया यहाँ भी पधारें -

    कविता :पूडल ही पूडल
    कविता :पूडल ही पूडल
    डॉ .वागीश मेहता ,१२ १८ ,शब्दालोक ,गुडगाँव -१२२ ००१

    जिधर देखिएगा ,है पूडल ही पूडल ,
    इधर भी है पूडल ,उधर भी है पूडल .

    (१)नहीं खेल आसाँ ,बनाया कंप्यूटर ,

    यह सी .डी .में देखो ,नहीं कोई कमतर

    फिर चाहे हो देसी ,या परदेसी पूडल

    यह सोनी का पूडल ,वह गूगल का डूडल .

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  5. मिलेगी तुमको भी सरकार से मदद लेकिन,
    तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई.

    बहुत सुंदर !

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  6. bahut behtareen..tumhare sath koi hadsa ho to sahi...yahi halat hai ab...

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  7. चलेगा कौन यहाँ सच के साथ? पहले यहाँ,
    बिना सहारे के सीधा खड़ा तो हो कोई,
    bahut bariya, raj sahib, is pe gaur pharmayein to varatmaan ke liyae bahut acha ho<3

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  8. राजीव जी, हमेशा की तरह उम्दा और दिल खुश करने वाली ग़ज़ल कही है.
    "समाअतों का यहाँ सिलसिला तो हो कोई,............" बहुत खूब मतला कहा है.
    "है इंकलाब ही इस दौर की ज़रूरत अब,..............", क्या कहने इस शेर के, बहुत जबरदस्त बानगी है इस शेर में. जिंदाबाद शेर. आज के वक़्त से रूबरू हालात को आइना दिखाता हुआ ये शेर लाजवाब कहा है. जिंदाबाद शेर.
    "मैं आसमान उसे कह भी दूं मगर उसका,................." वाह वा
    "मिलेगी तुमको भी सरकार से मदद लेकिन,...........", ज़हर बुझे तीर सा ये शेर बेमिसाल है.
    आखिरी शेर भी अच्छा बुना है.
    बेहद उम्दा ग़ज़ल कही है. तहे दिल से मुबारकबाद.

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  9. ♥(¯`'•.¸(¯`•*♥♥*•¯)¸.•'´¯)♥
    ♥नव वर्ष मंगबलमय हो !♥
    ♥(_¸.•'´(_•*♥♥*•_)`'• .¸_)♥




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    मैं आसमान उसे कह भी दूं मगर उसका,
    बुलंदियों से कहीं वास्ता तो हो कोई

    *
    मिलेगी तुमको भी सरकार से मदद लेकिन,
    तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई


    वाह ! वाऽह ! वाऽऽह !
    क्या बात है बंधुवर राजीव भरोल जी !

    पूरी ग़ज़ल काबिले-तारीफ़ है

    फेसबुक के साथ ब्लॉग पर भी रचनाएं डालते रहा करें ...
    ब्लॉग पर देर-सवेर भी रचना ढूंढ़ने-पढ़ने में आसानी रहती है ।
    :)

    आपकी लेखनी से ऐसे ही सदैव सुंदर , सार्थक , श्रेष्ठ सृजन होता रहे …
    नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार
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  10. My God.... You're a genius, really. I really love all your ghazals. Thanks for sharing with us.

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    1. इंतजार साहब, हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया.

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