बुधवार, 3 जुलाई 2013

ग़ज़ल: उस उम्र में था मेरा हर फलसफा गुलाबी

श्री पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर आयोजित होली के तरही मुशायरे में कही गई गज़ल पेश है...

आँखों में थे सितारे, हर ख़ाब था गुलाबी,
उस उम्र में था मेरा हर फलसफा गुलाबी.

मौसम शरारती है मेरी निगाहों जैसा,
है हर गुलाब तेरे, रुखसार सा गुलाबी.

फूलों को बादलों को, हो क्यों न रश्क आखिर,
गेसू घटाओं जैसे, रंग आपका गुलाबी.

बदला है कुछ न कुछ तो, कुछ तो हुआ है मुझको,
दिखता है आज कल क्यों, हर आइना गुलाबी.

होली का रंग है ये, कह दूंगा मुस्कुरा कर,
पूछा जो उसने क्यों है, चेहरा मेरा गुलाबी.



-आर.बी. 'राज़'

4 टिप्‍पणियां:

  1. आँखों में थे सितारे, हर ख़ाब था गुलाबी,
    उस उम्र में था मेरा हर फलसफा गुलाबी.

    होली का रंग है ये, कह दूंगा मुस्कुरा कर,
    पूछा जो उसने क्यों है, चेहरा मेरा गुलाबी.


    बहुत सुन्दर गज़ल

    उत्तर देंहटाएं

आपको यह पोस्ट कैसी लगी? अपनी पसंद या नापसंद अवश्य बताएं.