रविवार, 18 नवंबर 2018

ग़ज़ल: तेरा ऐ ज़िन्दगी हम साथ देंगे

तेरा ऐ ज़िन्दगी हम साथ देंगे
कि जब तक ले सकेंगे सांस लेंगे

किसे कल की ख़बर पर हम तुम्हारा
जहां तक हो सकेगा साथ देंगे

ये दिल के घाव अपनों ने दिये हैं
किसे मालूम ये कब तक भरेंगे

पपीहे तेरे दुख का गीत, बादल
सुनेंगे देखना इक दिन सुनेंगे

ये सोचा ही नहीं हमने कि तुम बिन
अगर जीना हुआ कैसे जियेंगे

तेरे अपने ही तेरी पीठ पीछे
बताऊँ क्या तुझे क्या क्या कहेंगे

हम अपनी सोच के इस शोरोगुल में
सदा ए दिल भला कैसे सुनेंगे

तेरी यादों  के दीपक जल उठे, अब
ये दीपक रात भर यूं ही जलेंगे

मेरे इस ख़ुदशनासी के सफ़र में
कदम जाने कहाँ जाकर रुकेंगे

नमी ढूँढा किये हो पत्थरों में
तुम्हें राजीव सब पागल कहेंगे


- राजीव भरोल 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपको यह पोस्ट कैसी लगी? अपनी पसंद या नापसंद अवश्य बताएं.